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मैं जब भी अकेले बैठकर तुमको याद करती हूँ। मैं रोना -मुस्कराना दोनों साथ करती हूँ।

बातें तो हम सभी करते हैं। पर खुद से बात -चीत हम कभी कभी करते है, और जब लड़कियाँ अपने आप से बात -चीत करती है वो खुद से मुकम्मल बात -चीत कर सकती हैं। इस पर एक शायरी आप सभी के लिए  है.... अक...