#ज़िंदगी#

ज़िंदगी कत्ल तू करती है ,
और सूली मेरे अरमानों को मिलती हैं ।
चले भी तो कैसे तेरी राहों पर ,
यहाँ हर पल समझौतों की मौत मिलती हैं। 
कर जाए जो हौंसला कभी इससे लड़ने का ,
उसकी सजा भी खूब ही मिलती है। 
ख़ुदा का दिया तौहफ़ा कहते हैं तुझे ,
फिर क्यों तू महंगे दाम ही मिलती है। 
सूनते है मिली है तू जीने के लिए,
फिर क्यों तू मरने के बाद ही मिलती है। 
जब भी खुशीयाँ खरीदने निकले है ज़िन्दगी से, 
ये खुद मज़बूरियों के बाज़ार बिकती मिलती है। 💐


कल्पना 💐😍

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